आधी आबादी की बात किये बिना न तो देश का हित हो सकता है न ही समाज का

लखनऊ 12 दिसम्बर. मानवाधिकार और लोकतान्त्रिक अधिकारों को लेकर चलाये जा रहे अभियान के तहत आज मुर्गखाना, हुसैनाबाद के लोगों से संवाद किया गया.

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मुक्तिबोध: सद्चित वेदना का कवि- रामजी राय

मुक्तिबोध  को समझने के लिए एक साहित्यिक की डायरी पढनी चाहिए. उसमे मुक्तिबोध के कई रूप हैं। उसमें वे अपने से भी बात करते

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गुलामी की अंतिम हदों तक लड़ने वाले कवि थे विद्रोही

गुलामी की अंतिम हदों तक लड़ने वाले कवि थे विद्रोही। 5/12/2017, इलाहाबाद, साहित्यिक मंच परिवेश की तरफ से कविता पाठ व व्याख्यान तथा “एक

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